अपने विचारो में थोड़ा अदब रखो।।
मनुष्य जन्म पाया है,
इस नाम पर कुछ तो सब्र रखो।।।

इतनी हेवानियत तो पशु पक्षी में भी नहीं दिखती,
कुछ तो लोगो का कदर रखो।।

क्यो अपनी कुंठित मानसिकता और पापों का किसी मासूम को शिकार बनाते हो,
जात-पात, दीन – धर्म,ईश्वर से तो तुम्हारा कोई वास्ता नहीं है,
पर कम से कम कुछ तो इंसानियत का मज़हब रखो।।।

मानती हूँ कानून से कोई खोफ नहीं तुम्हे,
पर उस भगवान के इन्साफ से तो डर रखो।।।

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