माँ की कोख में जब मैं थी..
मेरा इंतजार मेरे पापा कर रहे थे |
हर दिन कलेंडर की तारीख को काटते हुए
मेरे लिए पापा पालना बुन रहे थे । ।
मेरी इतनी फ़िक्र करते
की हर पल मेरा ख्याल रखते ।
माँ को जब भी तकलीफ होती
डॉक्टर के पास तुरंत पापा ले जाते । ।
हर दिन उनका एक ही काम
की सोचना है मेरा नाम ।
जब भी शाम को ऑफिस से आते
माँ को मेरे कई नाम सुनते । ।
सोते-सोते भी एक ही तमन्ना करते
मेरे लिए अपनी सारी खुशियाँ नौछावर करते ।
सुबह जब पापा आँख खोलते
मुझको महसूस करते । ।

एक दिन ऐसा आया
मेरा इस दुनिया में जन्म हुआ ।
मेरे पापा ने खुशियों के मारे
मुझपे सारा जहाँ लुटाया ।
मुझे अपनी गोदी में लेकर
अपने सीने से लगाया ।
मेने अपनी मुस्कान दिखकर
उनको हँसा दिया । ।

बचपन में जब माँ मरती थी
तब मुझको पापा मनाते थे ।
सारी खुशिया देने का वादा
मुझको पापा करते थे ।
धीरे धीरे दिन गुजरते गए
और में बड़ी होती गई ।
पापा के आखो में आशु
मेरे लिए बढ़ते ही गए ।
पापा सोचने लगे की
कैसा वर ढुडु मैं इसके लिए ।
जो अपनी खुशिया भी
न्यौछावर कर दे इसके लिए । ।

मेरे ससुराल जाने का
वक्त आ गया ।
पापा से विदा होने का
वक्त आ गया । ।

मेरी ज़िंदगी में सबसे अहम्
है मेरे पापा ।
जिसने मेरी खुशिया खुद से पहले चाही
ऐसे है मेरे पापा ।
ऐसे है मेरे पापा । ।

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