मै जब जब आँखे खोलु हुँ
गहरे साये छा जाते है
फिर जब ढून्ढू कही उजाला तो…
काले बादल छा जाते है

मै पल पल खोजा करती हुँ
मंजिल मंजर को सोचा करती हूँ
जब पहुँचती किसी ठिकाने पर तो
रास्ते गुम हो जाते है

फिर किसी वन मै खुद को पाती हुँ
भुल भुलेया उनकी देख मै फिर खो जाती हूँ
कुछ फुलो को देख फिर से रास्ते बनाती हुँ
तो फुल छोड भवरे उड जाते है

मै कोशिश करती रहती हुँ
तो कायदे बीच मै आ जाते है

पंछी की उडान देखना चाहुँ तो
परिन्दे घोसला छोड जाते है

मै लफ़्जो की कहानी बुनती हुँ..
और पन्ने ही उड़ जाते है

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Mahima Jain

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