वो दोस्त,अजब अंदाज अजब सादगी से
वो नेकी भी बड़ी खामोशी से करता है
मैं उसका दोस्त हु अच्छा ,यही नही काफी
उम्मीद ओर भी कुछ दोस्ती से करता है||
जवाब देने को ‘जी’ चाहता नही उसको
वो मजाक भी बड़ी अजिज़ी से करता है||
नई नही है ये उसकी आदत पुरानी है
शिकायते हो किसी की किसी से करता है
मुकबले क लिए लोग और भी है मगर
मुकाबले क लिये चुनाव अपनो का ही करता है||

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