यह सवाल बहुत से लोगो को चिडाता होगा की यह क्या नारीवाद नारीवाद लगा रखा है !सच बताऊ तो मैं भी कुछ समय पूर्व इन्ही लोगो में से एक था। पर धीरे धीरे मेने जब जाना की यहाँ नारी की वास्त्विक स्थिति क्या हैं तो मुझे कुछ यो लगा की भारत तो छोड़ो मेरे अपने परिवार, अपने गाँव को नारीवाद की ज्यादा आवश्यकता है। अगर आपको नारीवाद की सच्ची आवश्यकता पता करनी हो तो उस नारी से सम्पर्क करे जो आपके सबसे करीब हो, वो चाहे आपकी माताजी हो या चाहे आपकी दीदी या फिर आपकी अर्धांगिनी, बस जो आपको खुल के बता सके। अगर बदकिस्मती से वो समाज की इस मानसिकता का शिकार हुई होंगी तो आपको स्वयं ही यह अनुभूति हो जाएगी की उनके साथ कितने ही स्थानो पर शोषण किया गया है, पिछाडा गया है। पुरुष प्रधान सामाजिक मानसिकता के चलते स्त्रियों ने ऐसी परिस्थितियों का सामना किया है जिसकी हम कल्पना भी नही कर सके। जब कोई अपना जिससे आप स्वयं से भी ज्यादा प्रेम करते हो, अगर अपने अनुभवों को साझा करें , शायद तब आप उनकी पीड़ा को कुछ सीमा तक महसूस कर सकते है।

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हालांकि कुछ लोग नारीवाद की आड़ में अपनी मनमानी करते है चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, गलत है। ऐसा नही की सारी की सारी स्त्रिया इस विकृत सोच का शिकार हुई हो लेकिन मानवता के खातिर बाकि स्त्रियों के बारे में भी सोचना हमारा धर्म है।

नारीवाद मेरे शब्दों में सिर्फ नारी के अधिकारों का प्रचार-प्रसार करना नही है अपितु समाज के पलड़ो पर दोनों ही समुदाय को बराबरी का ओहदा देना है ।

अगर मेरा उत्तर से किसी के अंतर्मन को ठेस पहुँची हो तो क्षमा करें। मेरी गलतियों को इंगित कर मुझे सुधारने का मौका अवश्य प्रदान करे ।

आपका दिन मंगलमय हो।

कृतिक की कृति!

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Kratik Jain

A Noob. Trying to learn things while messing them up. 🙂

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