सही कहते हैं लोग वंश का दीपक तो बेटा होता हे,
बेटी का होना तो सिर्फ एक समझौता होता हे,
बेटा तो मनचाहा अक्षर पड़ जाता हे,
और बेटी की पड़ाई से बोझ बढ़ जाता है,
फिर भी भैया कि डिग्री देख बड़ा चहकती हैं,
पड़ाई के मोह से समझौता कर दुख ना किसी को कहती है,

बेटे के नए सपने तो सारा घर बुनता है,
बेटी की तकलीफ को कोई ना सुनता है,
हर अरमान को अपने सीने मे दफन कर जाती है,
हर कदम समझौता कर भी तिरस्कार ही पाती है,
बेटे को तो हमसफर भी मनचाहा मिलता हे,
उसे तो विवाह मे भी दूसरो की पसंद से वर मिलता है,
चार लोगो के काम उसे अकेले करना होते हैं,
हर बार समझौता कर आंसू पीना होते है,
चंद लम्हे भी पति के साथ सिर्फ खुद के ना बिता पाती है,

फिर नया समझौता कर साल भर में ही माँ बन जाती है,गोद में जब वो अपनी खुद की बेटी को पाती हैं,
फिर हिदायत उसे जल्दी बेटा करने की मिल जाती है,
मन ही मन ईश्वर से वरदान मांगती हे,बेटा हो जाए ऐसा ही बस वर मांगती है, कदम कदम पर समझौते से जब काफी थक जाती है,फिर से कोख मे बेटी रूपी कोई समझौता ना चाहती है,

क्यू कुछ लोग समझ नहीं पाते है कि वो भी एक इंसान है, मन मे आसमान से नहीं पर जीने के तो उसके भी अरमान हे, हर कदम पर त्याग कर अंत मे भी कुछ नहीं पाती है, बेटे बहू पे बोझ सी फिर वृद्ध आश्रम जा समझौता कर जाती है,

जरा सोचकर तो देखे
बेटी बिना सूना सारा आंगन हैं,
पत्नी बिना सूना सारा मधुबन हे,
माँ बिना अधूरा बागबान की है,
बेटी का जन्म कोई समझौता नहीं अभिमान हे..||

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Neha Yadav

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