छोटी बात थी बस बड़ी बन गई,
ज्यादा नहीं पर गलती हो गलती हो गई,
कोशिस की थी मेने रोकने की,
सोचा था मेने की अपने गुस्से को क़ाबू कर लूंगा,
लेकिन आज फिर न कर सका इसे , गुस्से ने मुझसे सब छीन लिया |

गुस्सा कभी कभी छोटी बात को बड़ी कर जाता है,
बिना सोचे कुछ गलत या मुँह से बहुत कुछ निकाल देता है,अच्छे रिश्तो में दरार लगा देता है,
रोकने की कोशिश कौन नहीं करता इसे, लेकिन इस छोटी उम्र मे काम का बोझ बढ़ जो गया है,
और अब तो सपने भी तो बड़े हो गए है अपने
ज़ब दिन रात मेहनत के बावजूद वो नहीं मिलेगा जो चाहते है हम तो गुस्सा तो आएगा ना.

आज कल तो हर वक़्त गुस्सा आता है,
लोग पूछते है,इतने गुस्से मे क्यों रहते हो भाई
कोई समझाओ उने, हर पल खुद से हार रहा हु
जो चाहता हु वो हासिल कर नहीं पा रहा हु
घर वालो के चेहरे पर मेरे नाम से मुस्कान देखना चाहता हु, पर मैं इसमें भी हार ही रहा हु
रिश्ते टूट रहे है मेरे, मैं अकेला हो रहा हु
हां मे खुद से हार रहा हु|

इस गुस्से की आदत से छूटना चाहता हु , मैं अब बहुत कुछ इसने छीन लिया है मेरा, इस गुस्से ने मुझे दुनिया से कई दूर कर दिया,
अपनों ने मुझे अकेला कर दिया,
मेरे सपने जिनसे मे दूर था उनसे मे और दूर हो गया,
न जाने कैसे पर मुझे ही बदल दिया |

हां मान गया मैं,
इस गुस्से ने मुझे तबाह कर दिया |

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Sumer Chhajer

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