नारी शक्ति को मानव सभ्यता के उद्गम से ही ऊंचा दर्जा दिया जाता है| उन्हें देवियों के रूप में पूज्य मानते हैं| हमेशा से ही नारी पूर्णतया अपने परिवार व समाज को समर्पित जीवन व्यतीत करती आई है हमेशा परिवार व समाज को महत्व देती है शायद इसलिए ही कोमल मानी जाती है|

नारी जीवन में नारी के किरदार की भूमिका बदल दी जाती है| पहले पुत्री के रूप में घर की इज्जत बचाने की भूमिका दी जाती है फिर बहन के रूप ,बाद में बहू के रूप में ,बाद में मां के रूप में लेकिन कभी भी उन्हें स्वयं के निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र नहीं छोड़ते तथा परिवार व समाज के बोझ से उनके सपनों की आहुति दे दी जाती है क्योंकि शायद हमारा समाज पुरुष प्रधान समाज है|

शहरों में महिलाओं से बलात्कार, घरेलू हिंसा अधिक होती है फिर भी राज्य सरकार व केंद्र सरकार समानता की योग्यता की बात करती है| जो की धरातल पर काल्पनिक प्रतीत होती है |दैनिक जीवन में नारी के शोषण की खबरें पढ़ते हैं तथा उनके साथ शोषण के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं जिन के समाधान के लिए कुछ उच्च कोटि के लोग टेलीविजन और मीडिया के असफल से विचार रखते हैं जो कि अभी तक सार्थक नहीं हो पाए इसलिए सफल भी नहीं होते हैं|

आज जहां विश्व के कई देशों में महिलाओं को समानता का अधिकार को आगे बढ़ने का अवसर दिए जाते हैं तो हमारा देश क्यों पीछे रहें आधी आबादी होते हुए भी महिलाओं को कुछ जगहों पर आरक्षण प्राप्त होता है वह भी 33% ,आधी आबादी होने के बाद भी इतना ही मिला है क्योंकि कुछ रूढ़िवादी लोग हर कहीं मिल जाते हैं जो महिला के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव रखते हैं शायद उन्हें उनकी काबिलियत व योग्यता पर संदेह है|

लेकिन हमें समाज के जिम्मेदार लोगों की जरूरत है जो ऐसी रूढ़िवादी पुरुष प्रधान समाज को महत्व देने वाली सोच का विरोध करें हम नया समाज ऐसा बनाएं जिसमें महिला व पुरुष कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े|
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Ghanshyam Singh

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