कुछ लोग है सोचते,
देश में अमीरो का राज है,
गरीब अमीर के भेद की,
सुनाउ मैं कहानी तुमको आज हैं।

मैं एक अमीर हुँ,
लोग कहते मुझमे कोई जज्बात नही,
अपने बच्चो की ख्वाहिशे तो पूरी कर देता हुँ,
पर रह पाता मैं उनके साथ नही।

मैं एक गरीब हुँ,
मेरी कोई इज्ज़त नही,
बुरा लगता है मुझे जब कर पाता,
मैं अपने बच्चो की ख्वाहिशे पूरी नही।

पैसा हैं, शोहरत हैं, नाम हैं,
रूतबा हैं, पर नींद नही,
हर चीज़ में अमीर हुँ,
पर हैं मेरे पास सूकून नही।

परिवार हैं, जीने का आधार हैं,
प्यार हैं, ख्वाब हैं, पर खुशी नहीं,
बहुत कुछ पाने की चाहत हैं,
पर मुझको मिलती राहत नही।

–निश्चय खिरे।

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Nishchay Khire

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