अभी कुछ दिन पहले कुछ घटनाएं ऐसी सुनाई दी जिससे दिल दहल गया स्कूली बच्चे और युवा वर्ग अपराधिक गतिविधियों में संलग्न हो रहे है ।बम बालस्ट हो या कोई और अपराध इं सबमें कुछ बाते समान है जैसे कि इन अपराधियों में अधिकतर शिक्षित और अच्छी वित्तीय स्थिति से है।फिर क्या कारण होते है इनको अपराधी बनने के। आज से 6-7 दशक पहले की बात करे तो अपराधी पढ़े लिखे नहीं थे समाज से निष्कासित थे पर आज तो तस्वीर सामने आती है वो बिल्कुल उलट है। आज जो अपराधी पकड़े जाते है वो शिक्षित है (बल्कि डॉ, इंजिनियर) पढ़े लिखे होने पर भी अच्छी राह छोड़कर गलत राह पे जाना क्या ये हमारी उच्च शिक्षा और समाज पर कलंक नहीं। कौन जिम्मेदार है – शिक्षा दीक्षा परवरिश।मेरी राय में तो परवरिश और संगत सबसे बड़ा कारण हो सकता है।

आज हम अच्छे विद्यालय में भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझते है। बस किताबी शिक्षा पर ही निर्भरता है हमारी ।घरों और विद्यालयों में संस्कारो की कमी। हम आधुनिकता की अंधी दौड़ में जिंदगी के असल मकसद ही भूल बैठे है।ब च्चो पर अव्वल आने का दबाव बनाते है या उन्हें आगे करने के लिए हम भी किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाते है।जैसे की एड मिशन के लिए सिफारिश या घूस देना।

परिवार के साथ बैठकर अपराधिक गतिविधियों को टीवी पर देखना। हर बात की जल्दबाजी बस भोगवादी फ़ैशन और हाई क्लास लाइफस्टाइल को ही सर्वोपरि मानना ही तो हम गलत राह पर ले जाती है।यही भूल है जब हम इनके पीछे भागेंगे तो बच्चे क्यों नहीं हमें देखकर ही तो सीखे अब वो हमसे एक कदम आगे रहेंगे ।हम कैरियर बना ने की बात करते है चरित्र (çharacter) की क्यों नहीं। अच्छा पैकेज और आधुनिक जीवनशेली(lavish lifestyle) ही सबकुछ नहीं है। जहा में की शांति नहीं परिवार का मूल्य नहीं वह जिंदाई कैसी? यही होड़ अपराध की तरफ अग्रसर करती है ।

सब्र करना आजकल की पीढ़ी में नजर ही नहीं आता। बच्चे कब आधुनिकता के पीछे भागते भागते छोटे छोटे अपराध करने लगते है पता ही नहीं चलता और यही सब एक दिन बड़े अपराध करा देती है। फिर पछताने के अलावा कुछ हाथ नहीं आता।

जैसे हम आज पढ़ाई का ध्यान रख रहे है वैसे ही जीवन मूल्यों और संस्करो भी ध्यान रखिए।ये किताबी ज्ञान से भी जरूरी है। बच्चे टीनएज में बाहरी दुनिया और दोस्ती से ज्यादा प्रभावित होते है ,उनकी संगत का भी विशेष ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।

बच्चों के साथ समय व्यतीत करें, अच्छे बुरे की पहचान सिखाए साथ ही धार्मिक मूल रूप भी बताए। नीतिगत बाते कहानियां अच्छी किताबे इं सब में सहयोगी रहेंगी। पर सबसे पहले हम खुद सुधरे और अपनी सोच में परिवर्तन लाए । बच्चे सिर्फ कैरियर नहीं केरेक्टर भी बनाना है। अच्छा भविष्य केवल अच्छा पैकेज गाड़ी बंगला नहीं अच्छा चरित्र ही होना चाहिए।

Sunayana Jain

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