नारी ,नारी क्यों नहीं रहना चाहती..

आजकल एक बड़ी विडंबना सामने आ रही है नई पीढ़ी की युवा लड़कियों की सोच पर। हर लड़की अपने आप को साबित करे वो ठीक, पर प्रतियोगिता करे की वो पुरुष जैसी है वो कहा तक सही। हां,शायद बात अटपटी जरूर लग रही है पर हां खुद की पहचान खोकर आज की लडकिया पुरुष जैसे बनने की होड़ में लगी हुई है।

मै ये नहीं कहती की सिर्फ घर गृहस्थी में रहना चाहिए। मेरी राय में तो खूब पढों नौकरी भी करो पर अपनी गरिमा, अपनी पहचान खो कर नहीं । सृष्टि ने स्त्री को खूबसूरत,ईमानदार,बुद्धिमान,साहसी,समझदार, वि वेकी बनाया है। सब्र की मूरत और मातृत्व की अमूल्य धरोहर के साथ पृथ्वी पर भेजा है।

सृष्टि को आगे बढ़ाने की धारा स्त्री ही है। वह सब लायकी स्त्री के पास है फिर भी महिलाओं को पुरुष जैसा क्यों बनना है? शायद इसकी वजह ये सामने आती है कि हमने ही पहले के कुछ दशकों से मानना शुरू कर लिया था मान ही लिया था कि पुरुष प्रधान समाज होती है यह से पतन भी हुआ और स्त्री के अंदर की पुरुष जैसा बनकर उससे आगे निकलने की होड़ भी जन्म लिया।

बल्कि होना था ये था कि पुरुष और स्त्री को समानता का हक है पर दोनों के दायित्व और क्षमताएं अलग है दोनों की अपनी एक काबिलियत है। ये बात समझ। मे आ जाए तो सारी उलझन ही खत्म हो जाए। पर विडंबना ये है कि स्त्री ही नहीं ये बात समझना चाहती तो पुरुष क्यों समझेंगे। स्त्री अपने वर्चस्व को हासिल करने की होड़ नहीं अपने आप को गरिमा पूर्ण करे। क्या कभी पुरुष से ऐसा सुना कि वो महिला जैसा बनना चाहता है …नहीं ना।

नारी ,नारी क्यों नहीं रहना चाहती..

सभी अपनी गरिमा को बनाकर चले तो विवाद ही खत्म। आलेख उन महिलाओं। के लिए है जो अपने दायित्व छोड़कर पुरुषों के काम पूरा करना चाहती है। आधुनिक होने का मतलब सिर्फ रहन सहन से नहीं हमारी सोच,हमारे कर्तव्य और दायित्वों को और बेहतर तरीके से करना होता है।

नारी ,नारी क्यों नहीं रहना चाहती..

एक संबोधन_ जो तुम कर सकती हो वो कोई नहीं कर सकता। तुम्हारी अपनी अलग स्वतंत्र उच्च स्थान है स्थान की गरिमा को न खोए।
होड़ में अपनी नारीत्व को खोए।
हमारी विजय अपना सम्मान बनाए रखने में ही है न कि अपने स्तर को गिराना।

और एक खास बात बराबरी कि होड़ में गलत आदतें और गलत चीजों का सेवन भी शुरू हो गया है। जो कि पुरुषों को भी सिर्फ पतन की ओर ले जा रहा है और हम उन बातो को अपना रहे है। सोचिए जरा……..

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2 Thoughts to “नारी ,नारी क्यों नहीं रहना चाहती..”

  1. Umesh Makwana

    Superb…
    तू ये ना भूल…
    नारी तु नारायणी है।

  2. यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमन्ते तत्र देवताः we believe in this and so recognise the independence of the women…

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