सुना है शाम आई है शमा की याद लाई है
हां मैं लौट आऊंगी कसम उसने उठाई है

कहा बरसात लाएगी मेरे संग भीग जाएगी
न तो स्वयं ही आई न बरसात आई है

परिंदे लौट आये है बढ़ रहे शाम के साये
द्वार भी खोल आये हम काश इस राह से वो आये

शाम वो याद है अब भी वो दिल मे जब समाई थी
मेघ ऐसे ही छाये थे,कुछ बारिश भी आई थी

शाम ये शाम थी ऐसी कभी न भूल पाई है
शाम अब ये भी जाएगी,तेरी पर याद न जाएगी
ख़्वाब में फिरसे आएगी,तू तो मन मे समाई है

आओ एक रोज निकलकर,ख़्वाब से सामने तुम तो
मिल जाये सुकून दिल पर,बेचैनी जो छाई है

कहा तब शाम ये आए,साथ मे तुझको जब लाये
मुमकिन ये नही फिर भी,दिल ने आस लगाई है

शाम की याद में हमने कलम अपनी उठाई है
कुछ तेरी याद को लिखा,कुछ लिखी तन्हाई है

Amit kushwaha

Get in touch for beautiful blogs and content

2 Thoughts to “सुना है शाम आई ह..”

  1. Amitbhai Kya baat hai! Bahut Badhiya! Shaam ke liye aise bhi socha ja sakta hai! Wah Kya Kalpana hai

    1. Shukriya😍❣️

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.