वो मां ही है..

वो है तो ज़िन्दगी में खुशियां ही खुशियां है, वो है तो हर जगह उम्मीदों की नई बगिया है। कभी कभी सोचता है ये मन, क्या रहा होगा उसका बचपन? उसकी खववहिशे? उसका मन ? वो भी कभी मासूम हुआ करती होगी , काम को देख कर वो भी जी चुराया करती होगी। लेकिन, लेकिन…

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बुलंद रख तू अपने इरादों को..

बुलंद रख तू अपने इरादों को, भूलना मत खुद से किये वादों को। उम्मीदों का आंचल पकड़ कर, ला पटक ज़मीन पर तारों को। आसमां से भी ऊंचा हौसला रख, खुद पर थोड़ा सा भरोसा कर। मंज़िल तू अपनी पायेगा, बस थोड़ा सा सब्र कर। कुछ तू इत्मीनान रख, चिंताओं को छोड़ कर। खुद को…

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