ये कहानी है  मेरे शहर की …

ये कहानी है मेरे शहर की … मेरे इंदौर की। इसकी उम्र भले ही जयादा हो पर ये अब भी जवान हैं। ये अब भी मेहनत करता हैं खुद को हमेशा की तरह रखने में ये मेहनत करता हैं सबसे आगे रहने के लिए। मेरे शहर से मुझे बहुत कुछ सिखने को मिलता हैं। मेरा…

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अन्न- सम्मान और अपमान..

वो कहते हेना कि जहाँ दाँत हैं वहाँ चने नही और जहाँ चने हैं वहाँ दाँत नही | ऐसा ही कुछ मैंने देखा जब मैं पलासिया से गीता भवन कि ओर जा रहा था | मैंने देखा कि सामने से एक भीखारी आ रहा हैं जिसकी हालत बद से बत्तर थी | पास ही में…

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हाल-ए-हिन्दुस्तान..

आज कल तो अखबार पढने का भी मन नही करता ऐसा नही कि मेरे पास वक्त नही है या मैं आलसी हो गया हुँ| कारण यह हैं कि मुझे पता हैं कि अखबार खोलते ही पहले पन्ने पर ही खबऱ होगी कि किसी अपने ने ही 2 साल की लडकी का बलात्कार किया| आए दिन…

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