इस गुस्से ने मुझे तबाह कर दिया..

छोटी बात थी बस बड़ी बन गई,
ज्यादा नहीं पर गलती हो गलती हो गई,
कोशिस की थी मेने रोकने की,
सोचा था मेने की अपने गुस्से को क़ाबू कर लूंगा,
लेकिन आज फिर न कर सका इसे , गुस्से ने मुझसे सब छीन लिया |

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वो बचपन ही अच्छा था..

वो बचपन ही अच्छा था..
जिसमे छोटी ख़ुशी भी बड़ी बात बन जाती थी,
बचपन की हसी भी किसी किसी के लिए दिन भर की थकान की दवा बन जाती थी.
सपने देखते थे सब बचपन मे लेकिन उन सपनो को खो देने का डर नहीं होता था,
सच्च मे वो बचपन ही अच्छा था|

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आज से देश स्वच्छ करते है|

हर दिन कुछ खास होता है हम मानते हेना ,
लेकिन इसे कुछ और खास बनाना हमारा काम है, हम क्यों नहीं मानते ? अपनी चीज़े तो हम सब को अच्छी लगती है उसकी देखभाल भी हम अच्छे से करते है
तो हमारी आस पास की जगह इतनी सुरक्षित क्यों नहीं है ? क्या वो हमारी नहीं है , या वो हमारे लिए नहीं है|

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