वो लड़की

वो लड़की कुछ चुप सी कुछ अनकही सी बातो को मन मे लेकर रहती है कुछ उम्मीदें कुछ सपने बुनकर रखती है मगर पागल हवा से डरती है कही उड़ा न ले जाए ये सपने इसलिये मन ही मन दबाकर रखती है चेहरे पर रूप तो निखरा है मगर आंधिया अंदर चलती है हसी मे…

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वो दोस्त..

वो दोस्त,अजब अंदाज अजब सादगी से वो नेकी भी बड़ी खामोशी से करता है मैं उसका दोस्त हु अच्छा ,यही नही काफी उम्मीद ओर भी कुछ दोस्ती से करता है|| जवाब देने को ‘जी’ चाहता नही उसको वो मजाक भी बड़ी अजिज़ी से करता है|| नई नही है ये उसकी आदत पुरानी है शिकायते हो…

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काश! मैं जो ‘थी’ वही आज भी होती।

मेरी तन्हाईयो से अकसर ये बात है होती काश किसी पल में अपने साथ में होती घिरी रहती हूँ ढेरो उलझनो में और सवालो में काश! मैं जो ‘थी’ वही आज भी होती। नहीं किसी से गिला और शिकवा साथ में होता न किसीको मुझसे कोई शिकायते होती “पलछिन” सा मन ये उडता रहता बादलों…

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