Bygone evening…

Bygone evening In the dusk of light, it was evening twilight. I walked through misty rain, sounds gain and woeful pain. Leafing on pew, a light glare appeared a silhouette with soft air. Damp road and the moist clothes, sat a gentleman with deep brows. His crescent eyebrows & ribboned eyelashes, dark eyes & smile…

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सफर- ए – ज़िन्दगी

सफर- ए – ज़िन्दगी क्यों गुमान है तुझे अपने होने पर, क्यों नाज़ है तुझे अपनी शौहरत पर, सांसे बाज़ार में ना बिका करती है। ज़िन्दगी हर पल धोखा देती हैं, अहमियत तो कर्मो से दिखाई पड़ती है। तू हर पल को जीने की ख्वाहिश रख, मानो खुशियों का मेला है जिंदगी, तू छोटी छोटी…

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Death..

मौत तू एक कविता है मुझसे इक कविता का वादा हैं, मिलेगी मुझको डूबती नब्ज़ो में जब दर्द को नींद आने लगे झर्द सा चेहरा लिए चाँद उफक तक पहुँचे दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब ना अंधेरा ना उजाला हो ना आधी रात ना दिन जिस्म जब खत्म हो और रूह…

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बचपन और बुढ़ापा

बचपन और बुढ़ापा उन तकिए और कम्बल में से बुढ़ापे की महक आ रही थी।और वह बूढ़ी दादी मानो हर रोज अपने बुढ़ापे को कोसा करती थी और भगवान से पूछा करती थी कि ‘यह बुढ़ापा उन पर कहर कि तरह क्यों बरसा है?’ उनकी पोती उनके पास आई,उनका सर दबाया,अपने कोमल हाथों से उनकी…

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Is Honour Killing really an act of Honour?

Is Honour Killing really an act of Honour? What is Honour? Google defines it as High respect, Great self esteem or The Quality of knowing and doing what is morally right. When exactly do you feel your honor challenged? At what point you start to feel that it becomes so intolerable that you end up…

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