उस बागबां का बेटा हृदय विशाल रखता हे,

उस बागबां का बेटा हृदय विशाल रखता हे, उस बागबां का बेटा हृदय विशाल रखता हे, सब चैन से सो जाए ये सदा ख्याल रखता है, वो भी एक आम इंसान होता हे, फिर भी एक अलग पहचान रखता है, कोई डोर पतंग नहीं आसमान में तिरंगा लहराता है, तभी तो सीमा का वो सैनिक…

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वो मां ही है…

वो मां ही है वो है तो ज़िन्दगी में खुशियां ही खुशियां है, वो है तो हर जगह उम्मीदों की नई बगिया है। कभी कभी सोचता है ये मन, क्या रहा होगा उसका बचपन? उसकी खववहिशे? उसका मन ? वो भी कभी मासूम हुआ करती होगी , काम को देख कर वो भी जी चुराया…

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नारी ,नारी क्यों नहीं रहना चाहती..

नारी ,नारी क्यों नहीं रहना चाहती.. आजकल एक बड़ी विडंबना सामने आ रही है नई पीढ़ी की युवा लड़कियों की सोच पर। हर लड़की अपने आप को साबित करे वो ठीक, पर प्रतियोगिता करे की वो पुरुष जैसी है वो कहा तक सही। हां,शायद बात अटपटी जरूर लग रही है पर हां खुद की पहचान…

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