यादों का जाला..

कई दिनों से अनछूए मेरे दिल के किसी कोने में यादों का जाला सा लगा है। उसे हटाने के कई प्रयास किए मैंने, लेकिन कुछ ज़िद्दी सा मालूम पड़ता हैं|साफ़ हो ही नहीं रहा है। पहली दफे उसकी बर्थडे पार्टी में हम मिले। साँवला सा दमकता हुआ चेहरा, लाल रंग का वन पीस और कुछ…

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रेत सी फिसलती जिंदगी..

रेत सी है यह ज़िन्दगी भी… दिन बीतते चले जाते है, हम महीनो पर पहुँच रहे होते है की साल बदल जाता है। बार बार मुट्ठी बंद करते है कि कुछ रह जाए हमारे पास पर सब रेत सा धीरे धीरे रिसता चला जाता है। कुछ तो रह जाए, हम हाथ खोलते है और हाथो में…

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अपने सपने, सपने बच्चों के..

हाल ही कुछ फिल्में बनी जो बच्चों के सपनो के आधार पृष्ठ पर थी। जिनमे एक ओर बच्चों को सपने देखने और पूरे करने की आज़ादी देना चाहिये पर ज़ोर दिया गया वही एक ओर माता पिता के सपनो को पूरा करने की जिम्मेदारी बच्चों की। शायद ये सवाल हर बच्चे और माता पिता के…

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