बचपन और बुढ़ापा

उन तकिए और कम्बल में से बुढ़ापे की महक आ रही थी।और वह बूढ़ी दादी मानो हर रोज अपने बुढ़ापे को कोसा करती थी और भगवान से पूछा करती थी कि ‘यह बुढ़ापा उन पर कहर कि तरह क्यों बरसा है?’ उनकी पोती उनके पास आई,उनका सर दबाया,अपने कोमल हाथों से उनकी पीठ सहलाई और…

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