रोबिन हुड आर्मी …

—-रोबिन हुड आर्मी—- मैंने सूरज को शाम में ढलते देखा था. .मैंने लोगों को भूख से ठिठुरते, कइयों को इस दुनिया से रुखसत होते देखा था. मैंने बच्चों को तड़पते और बड़ों को लाचार होते देखा था. मैंने बूढ़ों को भुक से बीमार होते देखा था. पर आज मैंने चांद को नील (गगन)में उठते हुए…

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