रेत सी फिसलती जिंदगी..

रेत सी है यह ज़िन्दगी भी… दिन बीतते चले जाते है, हम महीनो पर पहुँच रहे होते है की साल बदल जाता है। बार बार मुट्ठी बंद करते है कि कुछ रह जाए हमारे पास पर सब रेत सा धीरे धीरे रिसता चला जाता है। कुछ तो रह जाए, हम हाथ खोलते है और हाथो में…

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कैसे करें प्राथमिकताओं का चयन..

कैसे करें प्राथमिकताओं का चयन..? इसके लिए आपको यह जानना आवश्यक होगा कि आपकी दैनिक दिनचर्या क्या है. आपके लक्ष्य क्या है? हर इंसान की प्राथमिकता उनके लक्ष्य पर निर्भर करती हैं। कोई अपने दोस्तों के साथ वक्त बिताने मे अपनी रूचि दिखाता है तो कोई अपने निर्धारित काम को इमानदारी के साथ करने मे…

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अन्न- सम्मान और अपमान..

वो कहते हेना कि जहाँ दाँत हैं वहाँ चने नही और जहाँ चने हैं वहाँ दाँत नही | ऐसा ही कुछ मैंने देखा जब मैं पलासिया से गीता भवन कि ओर जा रहा था | मैंने देखा कि सामने से एक भीखारी आ रहा हैं जिसकी हालत बद से बत्तर थी | पास ही में…

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