अल्फ़ाज़

अल्फ़ाज़.. कभी सुनकर सिमट गए, कभी अनकहे ही रह गए कभी चाह कर भी न रुक पाए कभी जज्बो में बह गए दो राहो के मज़धर में कुछ के कुछ हो गए कभी जो कहे न गए वो भी सुने गए जो कह सके कभी वो न सुने गए ये अल्फ़ाज़ के जज़्बात है ‘पलछिन’…

Read More